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ISSN No. 3139-3284
An International, Multidisciplinary, Multilingual, Open-Access, Double-Blind Peer-Reviewed Research Journal
Article Information
Journal: Shibli National Academic Journal (SNAJ)
Volume: Volume 1 | Issue: Issue 1
निर्मल वर्मा : लेखक ,रचना और संप्रेषण का संकट (‘शब्द और स्मृप्त’ प्नबंध केदृप्िकोण से)
Abstract
शोध सारः
'शब्द और स्मृति' निर्मल वर्मा का निबंध संग्रह है जिसमें वे सजन व सुजन के लिए आवश्यक सौंदर्य तथा उसका समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में चर्चा करते हैं। वे सृजन को शुभ मानते हैं जो सत्यम, शिवम, सुंदरम की ओर ले जाने वाला होता है। 'शब्द और स्मृति' के निबंधों को 'पर्सनल ब्रूडिंग' कह कर वे विश्व की समस्त सृजन भावभूमि से जुड़ते हैं जो भौगोलिक सीमा के परे भी विश्व मानस को जोड़ता है। यह सृजन का सत्य गीता की कर्म प्रधानता से हमें जोड़ता है जहां लेखक स्वयं को अनुभव कर इलियट की निर्वैयक्तिकता के सिद्धांत के आधार पर सृजन करता है।
बीज शब्द : सौंदर्य, अभिव्यक्ति, लेखक, सृजन प्रक्रिया, मूल्यांकन, आत्म-मंथन, समाजव्यवस्था, मार्क्सवाद, संप्रेषण, नैतिकता
'शब्द और स्मृति' निर्मल वर्मा का निबंध संग्रह है जिसमें वे सजन व सुजन के लिए आवश्यक सौंदर्य तथा उसका समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में चर्चा करते हैं। वे सृजन को शुभ मानते हैं जो सत्यम, शिवम, सुंदरम की ओर ले जाने वाला होता है। 'शब्द और स्मृति' के निबंधों को 'पर्सनल ब्रूडिंग' कह कर वे विश्व की समस्त सृजन भावभूमि से जुड़ते हैं जो भौगोलिक सीमा के परे भी विश्व मानस को जोड़ता है। यह सृजन का सत्य गीता की कर्म प्रधानता से हमें जोड़ता है जहां लेखक स्वयं को अनुभव कर इलियट की निर्वैयक्तिकता के सिद्धांत के आधार पर सृजन करता है।
बीज शब्द : सौंदर्य, अभिव्यक्ति, लेखक, सृजन प्रक्रिया, मूल्यांकन, आत्म-मंथन, समाजव्यवस्था, मार्क्सवाद, संप्रेषण, नैतिकता
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