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ISSN No. 3139-3284
An International, Multidisciplinary, Multilingual, Open-Access, Double-Blind Peer-Reviewed Research Journal
Article Information
Journal: Shibli National Academic Journal (SNAJ)
Volume: Volume 1 | Issue: Issue 1
आत्मान्वेषण, मौन और सत्य की खोज का काव्य : तुम्हारी चुप्पियााँ एक घोषणा ित्र हैं
Abstract
सारांश
यह सामान्य धारणा है कि आप जीवन पर्यंत इस बात पर पश्चाताप कर सकते हैं कि आपने गलत चीज चुनी है इसलिए नहीं, बल्कि इसलिए कि आपको स्वयं को प्रमाणित करने का कोई अवसर नहीं मिला। स्वयं को प्रमाणित करने के लिए जानने के लिए आत्मावलोकन ही एकमात्र साधन है, अन्य साधन इसके जानने का उपक्रम भर हो सकता है। कवि कलाकार, तपस्वी आत्मान्वेषण ही करते हैं। यह आत्मान्वेषण बाह्य जगत से आंतरिक जगत की यात्रा है। जब इस दृश्यमान विराट जगत का शोर धीरे-धीरे आंतरिक जगत की ओर सूक्ष्मगत और शांत होता जाता है। तब कलाकार का आभायांतर धीरे-धीरे विराट होता जाता है। यही बाह्य जगत से आंतरिक जगत की यात्रा है। गीता में अर्जुन की यही यात्रा है, यही कबीर की यात्रा है, यही तुलसी की यात्रा है, यही अज्ञेय, निर्मल की यात्रा है, यही महर्षि रमण की यात्रा है। यही हरीश अरोड़ा की यात्रा है।
मुख्य तत्व: आत्मान्वेषण, आत्मावलोकन,कबीर, गीता
यह सामान्य धारणा है कि आप जीवन पर्यंत इस बात पर पश्चाताप कर सकते हैं कि आपने गलत चीज चुनी है इसलिए नहीं, बल्कि इसलिए कि आपको स्वयं को प्रमाणित करने का कोई अवसर नहीं मिला। स्वयं को प्रमाणित करने के लिए जानने के लिए आत्मावलोकन ही एकमात्र साधन है, अन्य साधन इसके जानने का उपक्रम भर हो सकता है। कवि कलाकार, तपस्वी आत्मान्वेषण ही करते हैं। यह आत्मान्वेषण बाह्य जगत से आंतरिक जगत की यात्रा है। जब इस दृश्यमान विराट जगत का शोर धीरे-धीरे आंतरिक जगत की ओर सूक्ष्मगत और शांत होता जाता है। तब कलाकार का आभायांतर धीरे-धीरे विराट होता जाता है। यही बाह्य जगत से आंतरिक जगत की यात्रा है। गीता में अर्जुन की यही यात्रा है, यही कबीर की यात्रा है, यही तुलसी की यात्रा है, यही अज्ञेय, निर्मल की यात्रा है, यही महर्षि रमण की यात्रा है। यही हरीश अरोड़ा की यात्रा है।
मुख्य तत्व: आत्मान्वेषण, आत्मावलोकन,कबीर, गीता
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